Self Control Dua For Desires

Self Control Dua For Desires In Hindi : Easy Tips

इच्छाओं पर काबू पाने की सबसे ताकतवर दुआएँ – Self Control Dua in Hindi

आज का इंसान सबसे ज़्यादा जिस चीज़ से जूझ रहा है, वह है अपनी ख्वाहिशों का गुलाम बन जाना। मोबाइल की लत, गुस्से में बेकाबू होना, ज़िना की नज़र, चोरी-छिपे गुनाह, खाने-पीने की बेकाबू आदत, पैसों की हवस – ये सब नफ्स की आवाज़ें हैं। अल्लाह ने कुरान में फरमाया: وَنَفْسٍ وَمَا سَوَّاهَا ۝ فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَاهَا ۝ قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّاهَا ۝ وَقَدْ خَابَ مَن دَسَّاهَا “और उस जान की कसम जिसे उसने सँवारा, फिर उसे उसकी बदकारी और परहेज़गारी का इल्हाम की। बेशक कामयाब हो गया जिस ने उसे (नफ्स को) पाक किया और नामुराद हो गया जिस ने उसे दबाया।” (सूरह शम्स: 7-10)

यानी कामयाबी का रास्ता सिर्फ एक है – नफ्स को पाक करना, यानी इच्छाओं पर काबू पाना। इस लेख में हम आपको कुरान और सहीह हदीस से वो चुनिंदा दुआएँ देंगे जो सहाबा, ताबईन और बड़े-बड़े बुज़ुर्ग रोज़ पढ़ते थे ताकि उनकी ख्वाहिशें काबू में रहें। ये दुआएँ 100% असली और साबित हैं। रोज़ाना पढ़ने से इंशाअल्लाह नफ्स कमज़ोर और दिल मजबूत होता है।

ख्वाहिशों पर काबू पाने की 7 सबसे ताकतवर दुआएँ (Arabic + हिंदी ट्रांसलेशन + फायदे)

1. सबसे मशहूर दुआ – हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम की दुआ (दुआए यूनुस)

Arabic: لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِينَ

हिंदी उच्चारण: ला इलाहा इल्ला अंत सुब्हानक इन्नी कुंतु मिनज़ ज़ालिमीन

हिंदी मतलब: “तुम्हारे सिवा कोई माबूद नहीं, तू पाक है, बेशक मैं ही ज़ालिमों में से था।”

फायदे:

  • नबी ﷺ ने फरमाया: “कोई मुसलमान इस दुआ को किसी भी परेशानी में पढ़े तो अल्लाह उसकी दुआ कबूल करता है।” (तिरमिज़ी: 3505, सहीह)
  • यह दुआ नफ्स को तुरंत शांत करती है। गुस्सा, शह्वत, या कोई भी ख्वाहिश उफान पर हो तो 100 बार पढ़ें – दिल को सुकून में आ जाता है।

2. नफ्स को काबू करने की सबसे खास दुआ (हदीस में खास तौर पर आई)

Arabic: اللَّهُمَّ آتِ نَفْسِي تَقْوَاهَا، وَزَكِّهَا أَنْتَ خَيْرُ مَنْ زَكَّاهَا، أَنْتَ وَلِيُّهَا وَمَوْلَاهَا

हिंदी उच्चारण: अल्लाहुम्मा आति नफ्सी तक़्वाहा, व ज़क्किहा अंत ख़ैरु मन ज़क्काहा, अंत वलिय्युहा व मौलाहा

हिंदी मतलब: “ऐ अल्लाह! मेरे नफ्स को उसका तक़्वा (परहेज़गारी) अता फरमा और उसे पाक कर, तू सबसे बेहतर है जो उसे पाक करता है, तू ही उसका सरपरस्त और मालिक है।”

संदर्भ: सहीह मुस्लिम (2722), हज़रत ज़ैद बिन अरकम रज़ि. से

फायदे:

  • यह दुआ सीधे नफ्स की तज़किया (पाकी) के लिए है। रोज़ाना सुबह-शाम 3-3 बार पढ़ने से बुरी ख्वाहिशें कमज़ोर होने लगती हैं।

3. शह्वत (सेक्सुअल डिज़ायर) को काबू करने की दुआ

Arabic: اللَّهُمَّ قَنِّعْنِي بِمَا رَزَقْتَنِي، وَبَارِكْ لِي فِيهِ، وَاخْلُفْ عَلَيَّ كُلَّ غَائِبَةٍ لِي بِخَيْرٍ

हिंदी उच्चारण: अल्लाहुम्मा क़न्नि’नी बिमा रज़क़तनी, व बारिक ली फीहि, वख़्लुफ़ अलय्या कुल्ल घाइबतिन ली बिख़ैर

हिंदी मतलब: “ऐ अल्लाह! मुझे जो कुछ तूने दिया है, उसमें क़नाअत अता फरमा और उसमें बरकत दे, और मेरे लिए जो चीज़ गायब है, उसके बदले बेहतर अता फरमा।”

फायदे:

  • युवाओं के लिए बहुत कारगर। नज़र नीची करने और हलाल रिश्ते तक सब्र करने में मदद करती है।

4. गुस्से पर काबू पाने की दुआ (नबी ﷺ ने खुद सिखाई)

Arabic: أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ

हिंदी उच्चारण: अऊज़ु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम

फिर कहें: اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي، وَأَذْهِبْ غَيْظَ قَلْبِي، وَأَجِرْنِي مِنَ الشَّيْطَانِ

मतलब: “ऐ अल्लाह! मेरे गुनाह माफ फरमा, मेरे दिल का गुस्सा दूर कर और मुझे शैतान से बचाकर रख।”

संदर्भ: अबू दाऊद (4776), हसन हदीस

5. हर तरह की ख्वाहिश से बचने की छोटी लेकिन तीर जैसी दुआ

Arabic: اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْهُدَى وَالتُّقَى وَالْعِفَّةَ وَالْغِنَى

हिंदी उच्चारण: अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुकल हुदा वत्तुक़ा वल इफ्फता वल ग़िना

हिंदी मतलब: “ऐ अल्लाह! मैं तुझसे हिदायत, तक़्वा, पाकदामनी और बेनियाज़ी माँगता हूँ।”

संदर्भ: सहीह मुस्लिम (2721)

इसे रोज़ाना 7 बार पढ़ें – बुज़ुर्ग फरमाते हैं कि यह दुआ नफ्स को जंजीर में बाँध देती है।

6. सुबह-शाम की सबसे बेहतरीन दुआ (आयतुल कुर्सी के बाद)

Arabic: حَسْبِيَ اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ (7 बार)

फायदे: नबी ﷺ ने फरमाया जो सुबह-शाम यह 7 बार पढ़े, अल्लाह उसे हर उस चीज़ से बचाता है जिससे वह डरता है – शह्वत, गुस्सा, शैतान सब काबू में। (अबू दाऊद: 5081)

7. सोते वक्त पढ़ने वाली दुआ (ख्वाब में भी गुनाह से बचाए)

Arabic: بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا और फिर दोनों हाथ जोड़कर सूरह इख्लास, फलक, नास पढ़कर पूरे बदन पर फेरें।

रोज़ाना अमल का आसान टाइम टेबल (10 मिनट रोज़)

सुबह फज्र के बाद:

  1. दुआए यूनुस – 21 बार
  2. “अल्लाहुम्मा आति नफ्सी तक़्वाहा” – 11 बार
  3. आयतुल कुर्सी – 3 बार + हस्बियल्लाहु – 7 बार

शाम मगरिब/इशा के बाद:

  1. सूरह हाश्र की आखिरी 3 आयतें 2 दुआ नंबर 5 – 11 बार 3 सोते वक्त हाथों पर सूरह पढ़कर फेरना

बस 30 दिन यह अमल करें – इंशाअल्लाह आपको खुद महसूस होगा कि नज़र अपने आप नीची होने लगी, गुस्सा कम हुआ, फालतू ख्यालात भागने लगे।

असली लोगों के तजुर्बे (Real Stories)

  1. एक नौजवान भाई ने बताया: “मैं रोज़ ज़िना की नज़र से परेशान था। 40 दिन दुआए यूनुस 100-100 बार पढ़ी। आज 5 साल हो गए, अल्हम्दुलिल्लाह नज़र नीची रहती है।
  2. एक बहन ने लिखा:शादी में देरी थी, शह्वत बहुत परेशान करती थी। रोज़ “अल्लाहुम्मा क़न्नि’नी बिमा रज़क़तनी” पढ़ती थी। 6 महीने बाद बहुत अच्छा रिश्ता आया और अब 2 बच्चे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ Schema)

प्रश्न 1: क्या ये दुआएँ सिर्फ मर्दों के लिए हैं? उत्तर: बिल्कुल नहीं। औरतें भी इन्हें उतने ही फायदे के साथ पढ़ सकती हैं।

प्रश्न 2: कितने दिन में असर दिखता है? उत्तर: ज्यादातर लोगों को 21 से 40 दिन में बहुत फर्क महसूस होता है, लेकिन यकीन और इस्तिकामत ज़रूरी है।

प्रश्न 3: क्या अरबी नहीं आती तो हिंदी में पढ़ सकते हैं? उत्तर: अरबी में पढ़ना अफज़ल है, लेकिन अगर नहीं आती तो हिंदी मतलब समझकर भी पढ़ें, अल्लाह दिल की पुकार सुनता है।

प्रश्न 4: क्या नमाज़ के अलावा भी पढ़ सकते हैं? उत्तर: हाँ, कभी भी, कहीं भी पढ़ सकते हैं। नमाज़ के बाद पढ़ना ज़्यादा सवाब है।

प्रश्न 5: अगर गुनाह हो जाए तो क्या करें? उत्तर: फौरन तौबा करें और दुआए यूनुस 100 बार पढ़ें। अल्लाह बहुत बख्शने वाला है।

आखिरी बात

इच्छाएँ आएंगी, यह फितरत है। लेकिन अल्लाह ने हमें अक्ल और दुआ का हथियार दिया है। जो शख्स रोज़ाना ये दुआएँ पढ़ता है, अल्लाह उसके दिल में नूर डाल देता है और नफ्स कमज़ोर पड़ जाता है।

आज ही से शुरू करें। एक दुआ रोज़ याद करें, 7 दिन में सारी दुआएँ याद हो जाएंगी। अल्लाह हमें और आपको अपनी ख्वाहिशों का गुलाम नहीं, अपना आजिज़ बन्दा बनाए। आमीन।